Wednesday, 29 September 2021
अवैध हथियार के साथ सज्जाद सराडी गिरफ्तार
Tuesday, 28 September 2021
वल्लभनगर, धरियावद सीट : उप चुनाव कार्यक्रम घोषित - 30 अक्टूबर को होगा मतदान, 2 नवम्बर को आएंगे नतीजे
✍️ सलूम्बर ब्लॉग. भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को लोकसभा और विधानसभा सीटों के उप चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। सभी सीटों पर ईवीएम से मतदान होगा।
इसके तहत राजस्थान में विधानसभा की सिर्फ दो सीटों पर उप चुनाव होंगे जो कि उदयपुर संभाग में आती है। यह दोनों सीटें उदयपुर जिलान्तर्गत 155-वल्लभनगर और प्रतापगढ़ जिले की 157-धरियावद (एसटी) है।
इसे लेकर आयोग के सचिव संजीव कुमार प्रसाद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विस्तृत चुनाव कार्यक्रम बताया है। इसके तहत राजस्थान की उक्त दोनों सीटों के लिए शुक्रवार 1 अक्टूबर 2021 को चुनावी अधिसूचना जारी की जाएगी।
नामांकन दाखिले की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर रहेंगी और 13 अक्टूबर तक नाम वापसी हो सकेगी। इसके बाद शनिवार 30 अक्टूबर को मतदान होगा और मंगलवार 2 नवम्बर 2021 को मतगणना कर नतीजे घोषित किये जायेंगे।
ज्ञातव्य हैं कि वल्लभनगर विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत (कांग्रेस) और धरियावद गौतम लाल मीणा (भाजपा) का पिछले दिनों कोरोना से निधन हो गया था। तब से दोनों सीटें रिक्त हैं।
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12 वें सलिला साहित्य सम्मान हेतु रचनाकारों की घोषणा
Sunday, 19 September 2021
अनंत चतुर्दशी व्रत का इतिहास और महत्व
बिहारीलाल पुरोहित.
भारतीय व्रतों का अपना विधान है। प्रायश्चित से लेकर पुण्य अथवा मनोरथ की सिद्धि व्रतों के पालन के मूल में रही है। व्रतों की संख्या किसी के लिए तो गिन पाना बहुत मुश्किल है। व्रतराज, व्रतार्क जैसे निबंधकार के लिए भी यह संख्या अगणित रही, उसने करीब पंद्रह सौ व्रतों का उल्लेख किया है।
कई बार लगता है कि तीन सौ पैंसठ दिनों में इतने व्रत कैसे आ जाते होंगे! एक जन्म भी कम पडता है, इन व्रतों के पालन के लिए। यही वजह है कि धर्मावलम्बी महिलाओं का यह मत होता हैं - जितने सिर पर केश होते हैं, उतने ही व्रत करने होते हैं।
पुराविद डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार
अनंत चतुर्दशी का व्रत अनंत के नाम पर किया जाता है। इसे अणत चौदस भी कहा जाता है। यह मूलत: नाग संस्कृति का परिचायक है। नाग संस्थान का वर्णन महा पुराणों, पुराणों और उपपुराणों, औपपुराणों में ही नहीं, बौद्ध और जैन ग्रंथों में भी मिलता है।
'अनंत' और कोई नहीं, नाग का ही नाम है जिसके फण अनंत हों किंतु जब से भगवान श्री नारायण की विशिष्ट मान्यता हुई, अनंत को उनका शयन, आसन स्वीकारा गया और यह व्रत अनंतशायी विष्णु के नाम हो गया।
(चित्र : सूती धागे की अणत)
मूलत: यह चौदह गांठ का डोरा बनाकर भुजा पर बांधने की परंपरा पर आधारित व्रत था। मध्यकालीन भविष्यपुराण के व्रतों में इस व्रत के विधान और फल को लिखा गया है।
चौदस का दिन, चौदह गांठ वाला डोरा, चौदह साल तक करने का विधान और चौदह जनों को भोजन करवाने और फिर चौदह वस्तु दान कर उद्यापन करने जैसी परंपरा है।
(चित्र : रेशमी धागे की अणत)चौदह की संख्या हमारे यहां चौदह मनु, चौदह इंद्र, चौदह मर्यादा, चौदह भुवन, चौदह वर्ष आदि के साथ जुड़ी हुई है। कहीं न कहीं यह संख्यावाची व्रत भी है।
तिथि में चौदस का अपना महत्व है और उसका प्रसार अरब तक भी रहा है। तिथियों की देवता के साथ संबद्धता अनेक पक्षों को लिए है जैसा कि वराहमिहिर (587 ई.) ने समास संहिता के तिथि गुणाध्याय में माना है।
भविष्यपुराण की कथा में कौंडिन्य की कथा है और उसमें दान की महिमा बताई गई है। दो बहनें थीं। दोनों परस्पर ही दान करती थी, ऐसे में वे बावड़ियां बनीं। एक लबालब हो जाती तो उसका पानी दूसरी में चला जाता, दूसरी भर जाती तो उसका पानी पहली में चला जाता...।
कुल मिलाकर यह व्रत पश्चिमी भारत के उस मरुकांतार क्षेत्र से संबंद्ध रहा है जहां पानी कम था। विदिशा से लेकर माध्यमिका तक कभी नागों का वर्चस्व था, इसलिए चित्तौड के पास मिले 8वीं सदी के पुठौली अभिलेख में कहा गया है समुद्र मंथन से थके हुए मातोली सर्पराज ने इधर आश्रय लिया था...।
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Tuesday, 14 September 2021
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Sunday, 12 September 2021
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Friday, 10 September 2021
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Wednesday, 8 September 2021
सलुम्बर में गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारीया जोरो पर.
सलुम्बर में गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारीया जोरो पर
शहर सहित क्षैत्र मे भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाये जाने वाले गणेष चतुर्थी पर्व को लेकर तैयारीया जोरो पर है। गणेष मंदिरो मे साफ सफाई धुलाई के साथ रंग रोगन का कार्य अन्तिम चरणो मे किया जा रहा है। शुक्रवार 10 सितम्बर को मनाई जाने वाली गणेष चतुर्थी को लेकर क्षैत्रवासियो मे खासा उल्लास देखा जा रहा है। उदयपुर रोड़ पर बनाई जा रही गणेष प्रतिमाओ के स्थल पर लोगो की प्रतिमा बुकिंग के लिए भीड लग रही है। हालाकि कोरोना गाईड लाईन के चलते सार्वजनिक स्थलो पर गणेष महोत्सव के पाण्डाल नही बन रहे है। लेकिन गणराज के श्रृद्धालु विग्नहर्ता को घरो मे विराजित करने के लिए तैयारीया करते नजर आ रहे है। श्री बड़ा गणपति मंदिर, रूप गणपति मंदिर, मन्षापुर्ण गणपति मंदिर, सिद्धीविनायक मंदिर सहित गणेष मंदिरो मे चौथ के आयोजन को लेकर विषेष तैयारीया हो रही है। गणेश चौथ को लेकर श्री बड़ा गणपति महाराज के मंदिर को फुलो से सजाया जाएगा। और चौथ के दिन शुक्रवार दोपहर अभिजित मुहुर्त मे मंदिर गुम्बद पर ध्वजा परिवर्तित कि जाएगी। चौथ से चतुर्थदषी तक प्रतिदिन भगवान की शोडोपचार पुजा कर संध्याकाल मे महा आरती उतारी जाएगी।
शरद पूर्णिमा के लिए पौराणिक भारतीय आयुर्वेद का विशेष योग
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