Salumbar Blog | एक सूखे नारियल (खोपरा, गोटा, गोला) को बीच में से काटकर दो टुकड़े करें. एक कांसी की थाली लें. अब एक खोपरे के टुकड़े में जितनी मात्रा में आ सके उतनी साबुत काली मिर्च भरकर उसे कांसी की थाली में खाली कर लें.
अब उसी खोपरे के टुकड़े में जितनी मात्रा में आ सके उतना खांड का बूरा या डोरा मिश्री के टुकड़े भरकर उसी कांसी की थाली में कालीमिर्च के साथ मिला लें. अब उसी खोपरे के टुकड़े में शुद्ध देशी घी भर लें. उसे भी कालीमिर्च बूरा में डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें.
अंत में नारियल के दूसरे आधे टुकड़े में देशी घी भरकर कांसी की थाली वाले मिश्रण पर रख दें. अब इस थाली को शरद पूर्णिमा की संध्या से रातभर चंद्रमा की पावन रोशनी में रखें. सुबह प्लेट की सारी सामग्री (कालीमिर्च, बूरा, घी व आधा खोपरे का टुकड़ा) को मिक्सर में पीस लें.
केवल घी से भरा रातभर रखा हुआ खोपरे का एक टुकड़ा ही पीसना है. दूसरे टुकड़े को आप किसी अन्य काम में उपयोग कर सकते हैं और पिसे हुए मिश्रण को एक काँच के ढक्कनदार बर्तन में निकाल लें.
इस दिव्य अमृतमय योग को किसी भी उम्र के व्यक्ति को एक चम्मच सुबह-सुबह चबाकर उपर से गर्म दूध पी लेने की सलाह दी जाती है.
इस योग का सेवन करने वाले की आँखे स्वस्थ रहती है, रोशनी में बढ़ोतरी होती है और मस्तिष्क में बुद्धिबल मिलता है.
याद रहे कि थाली कांसी धातु की ही लेनी चाहिए क्योंकि चंद्रमा की किरणों का प्रभाव हर धातु पर अलग अलग पड़ता है. कांसी के अभाव में चांदी की थाली उपयुक्त रहती है.
🙏साभार : श्री एसबी मुथा🙏
| सलूम्बर ब्लॉग |
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