बिहारीलाल पुरोहित
सलूंबर नगर को दो भागों में बांटने वाला, ह्रदय स्थल गांधी चौक क्षेत्र में प्राचीन श्री बड़ा गणपति मन्दिर सदियों से आस्था का केंद्र है। रियासतकाल में यह क्षेत्र नगर का आखिरी छोर हुआ करता था और शमसान भूमि यानी मसान था। जिससे क्षेत्र के कई बुजुर्ग इसे आज भी मसानिया गणपति या मसाणिया गणेश के नाम से भी पुकारते है।
इस मंदिर के शिखर पर विधान पूर्वक ध्वज-कलश स्थापना का कार्य करीब 8 वर्ष पूर्व हुआ। नगर में गणेश चतुर्थी पर दर्शन के लिए सबसे ज्यादा रेलमपेल यही पर रहती है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त में धूमधाम से ध्वजा परिवर्तित की जाती है। तीज-त्योहार से लेकर अन्य दिनों निकलने वाली शोभायात्रायो, धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक जुलूसों का अस्थाई मुकाम, ठहराव इस मंदिर पर जरूर सुनिश्चित किया जाता है।
इस प्राचीन मंदिर के सैकड़ों नियमित श्रद्धालु है। खासकर प्रत्येक बुधवार को यहां सुबह शाम के समय इनके आने का क्रम लगा रहता है। विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य की शुरुआत में सबसे पहला न्यौता यहां गणपति के चरणों में अर्पित करते हैं। कई लोग नव युगल को धोक लगाने नए वाहन को भी पूजा के लिए लाते हैं।
प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक पूरे मन्दिर को फूलों से सजाया जाता है। रोजाना शोडोपचार पूजा विधान होता है। अनंत चतुर्दशी पर कम से कम पांच हजार मोदक का भोग धराकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाता है।
चित्र: सलूंबर के प्राचीन श्री बड़ा गणपति मंदिर में गणेश चतुर्थी पर भगवान का रजत श्रंगार।
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