Tuesday, 14 September 2021

भगवान बलराम जयंती : जानिए कृषि देवता के जीवन, चरित्र की विशेषताएं

✍️ नरोत्तम पुरोहित.
भादौ मास के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को भगवान बलराम या बलभद्र का जन्म हुआ था। बलराम रोहिणी-वसुदेव के पुत्र और भगवान श्री कृष्ण के सौतेले अग्रज भ्राता है। उन्होंने रेवती से विवाह किया। एक किसान परिवार में जन्म लेने के बाद कृष्ण ने पशुपालन और बलराम ने वैज्ञानिक, उन्नत कृषि पर अविस्मरणीय कार्य किये थे।
(चित्र : हल, मूसल के साथ भगवान बलराम)

उन्होंने प्राकृतिक रूप से उपजी फसलों का बीज उत्पादन और नहर के माध्यम से फसलों की सिंचाई का आविष्कार किया था। जिससे बलराम को पृथ्वी का प्रथम नहर व बीज वैज्ञानिक भी माना जाता है।

बलराम ने अस्त्र के रूप में हल व मूसल को धारण किया था इसलिए इन्हें हलधर भी कहते है। अपने औजार रूपी अस्त्रों से बुवाई व फसल निकालने के साथ शत्रुओं का संहार भी करते थे।

बलराम का राष्ट्रीय चरित्र बहुत ऊंचा था।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अहंकार की जगह राष्ट्र को सर्वोपरि मान कर ही पुरुषार्थ किया। अपने राष्ट्र को जन-धन हानि के संकट से बचाने के लिए उन्होंने जरासंध के साथ युद्ध में आत्म समर्पण कर राष्ट्रवादी चरित्र का परिचय दिया।

महाभारत युद्ध के दौरान समूचे राष्ट्र के राजा व सेनाएं किसी न किसी पक्ष की ओर से युद्ध के मैदान में थे। ऐसे में बलराम किसी का पक्ष लिये बगैर तीर्थाटन के लिए निकल गए थे। उनका यह निर्णय गैर राजनीतिक चरित्र को दर्शाता है।

काश्तकारी के प्रतीक हल व मूसल को अस्त्र स्वीकार करके हलधर कहलाने वाले, प्रथम बीज, नहर वैज्ञानिक, राष्ट्रवादी आदि चारित्रिक विशेषताओ से अंगीकृत भगवान बलराम को लोक में कृषि देवता के रूप में स्वीकार किया।
(चित्र : भगवान बलभद्र का 17वीं शताब्दी का एक भित्ति चित्र)

तब से ही भगवान बलराम के जन्मदिन मतलब भादौ मास के शुक्ल पक्ष की षष्टी को गांवों और मुख्यतः पशुपालक, काश्तकार वर्ग में बड़े उल्लास के साथ त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।
Salumbar Blog
#बलराम #बलभद्र #हलधर #बलरामजयंती

No comments:

Post a Comment

शरद पूर्णिमा के लिए पौराणिक भारतीय आयुर्वेद का विशेष योग

S alumbar Blog |  ए क सूखे नारियल (खोपरा, गोटा, गोला) को बीच में से काटकर दो टुकड़े करें.  एक कांसी की थाली लें.  अब एक खोपरे के टुकड़े में ज...