Saturday, 20 January 2018

शिवकथा : सफल आयोजन के संकल्प के साथ हुआ भूमि पूजन

सफल आयोजन के संकल्प के साथ हुआ भूमि पूजन

गिरि बापू के मुख से होगी नौ दिवसीय कथा, 11 कुंडीय महारूद्र हवन होगा


सलूंबर। सौराष्ट गुजरात के अंतर्राष्टीय शिवकथा मर्मज्ञ गिरि बापू के मुख से मुख्यालय पर नौ दिवसीय संगीतमय कथा एवं 11 कुंडीय महारूद्र हवन यज्ञ होगा। इसे लेकर शुक्रवार को कमलुदिया भेरू के निकट बाईपास रोड पर विधान पूर्वक भूमि पूजन किया गया। आचार्य पुरूषोत्तम जोशी, पं. कन्हैयालाल जानी ने मंत्रोच्चार के बीच यजमान गौतमलाल मेहता परिवार के हाथों भूमि पूजन कराया। इसके बाद आयोजन समिति की बैठक हुई। जिसमें सर्वसमाज की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए सफल आयोजन का संकल्प लिया गया। आरंभ में लव व्यास ने स्वागत उद्बोधन दिया। रिटायर्ड आरएएस टीआर जोशी, नगर पालिकाध्यक्ष कमला गांधी, हेमंत भट्ट, भगवतीलाल सेवक, जयप्रकाश आगाल, अंबालाल शर्मा, रामेश्वर जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन लीलाधर त्रिवेदी ने किया।
शिवकथा मर्मज्ञ का पहला आयोजन होगा:


सलूंबर। शिवकथा व 11 कुंडीय महारूद्र हवन का क्षैत्र में संभवतया यह पहला आयोजन होगा। जबकि अन्य कथाएं कई बार हो चुकी है। साथ ही अंतराष्टीय स्तर के कथा मर्मज्ञ के मुख से कथा का यह पहला मौका है। इससे पूर्व एसा आयोजन क्षैत्र में नहीं हुआ है। जिसके चलते आयोजन को लेकर खासा उत्साह है।
इधर आयोजन समिति के भूपेंद्र पण्ड्या ने बताया कि आयोजन स्थल पर विशाल डोम पांडाल का काम शुरू हो गया है। वहीं 11 कुंडीय हवन यज्ञ के लिए मिट्टी, गोबर व लकडियों आदि से 35 फीट उंची यज्ञशाला को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं हवन कुंड व अन्य यजमानों के चयन तथा प्रचार-प्रसार का काम जोरों पर है। आयोजन समिति की विभिन्न टोलियां व्यवस्थाओं में जुटी है। उल्लेखनीय है कि आयोजन 26 जनवरी से 3 फरवरी तक होगा।

40 हजार बच्चो की पिलायी जाएगी पोलियो की खुराक

स्वास्थ्य विभाग की तैयारी बैठक सम्पन्न

सलूम्बर। देष को पोलियो मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे पल्स पोलियो अभियान के तहत 28 जनवरी व 11 मार्च को पिलाई जाने वाली प्रथम खुराक को लेकर तैयारी बैठक सम्पन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता उपखण्ड अधिकारी धर्मवीर गुजर ने की। अभियान के तहत ब्लाॅक के करीब 40 हजार बच्चो को प्रथम खुराक पिलायी जाएगी।

Image result for pulse polioउदयपुर रोड़ स्थित ब्लाॅक चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शुक्रवार तैयारी बैठक सम्पन्न हुई जिसमें एसडीएम गुजर ने 28 जनवरी रविवार को पल्स पाॅलियो अभियान के चलते विद्यालय खुले रखने व स्काउट गाइड व अन्य स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ राजकीय कर्मियो को सेवाएं देने के निर्देष दिये। ब्लाॅक चिकित्सा अधिकारी गजानन गुप्ता ने तैयारियो की जानकारी दी। वही स्वास्थ्य निरिक्षक लिलाधर त्रिवेदी ने बताया कि अभियान के तहत ब्लाॅक में 154 बूथ लगाये जाएंगे। जिन पर कारीब पांच दर्जन से अधिका सुपरवाईजन, चिकित्सा अधिकारी व अन्य कार्मिक सेवाए देंगे। अभियान के तहत ब्लाॅक में करीब 40 हजार बच्चो को पल्स पाॅलियो की पहली खुराक पिलायी जाएगी।

Wednesday, 17 January 2018

घर बैठे करें सिम को आधार से लिंक

घर बैठे करें सिम को आधार से लिंक, सहायता के लिए Toll Free नंबर जारी

देशभर में आधार और मोबाइल सिम कार्ड रि-वैरिफिकेशन प्रक्रिया अब थोड़ी आसान कर दी गई हैं। ग्राहकों अब मोबाइल नंबर आधार से लिंक करने के लिए केवल एक सेंट्रल नंबर डायल करना होगा। यह खबर उन ग्राहकों के लिए निश्चित रूप से राहत भरी है जिनेक पास अबतक केवल अपने मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर के ऑफलाइन स्टोर पर जाकर लिंक करवाने का ही विकल्प था। अब वे स्टोर पर जाने के बजाय घर बैठे आईवीआर सेवा के माध्यम से यह काम कर सकते हैं।कैसे करें आधार को मोबाइल फोन नंबर से लिंक-
-किसी भी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर के ग्राहकों को आधार से अपने मोबाइल नंबर को रिवैरिफाई करने के लिए अपने फोन से टोल फ्री 14546 नंबर डायल करना है।
-इसके बाद उस विशिष्ट विकल्प का चुनाव करने पर आपसे आपकी नागरिकता पूछी जाएगी।
-अगले स्टेप में अपने फोन के कीपैड से 1 नंबर को दबाकर आधार और मोबाइल नंबर की लिंकिंग के लिए मंजूरी देनी होगी।
-इसके बाद अपना आधार नंबर डालकर कीपैड से एक नंबर को दबाकर कंफर्म करें।
-आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। इसे अपने फोन में एंटर करें।
-इसके बाद मोबाइल ऑपरेटर आपकी मंजूरी लेकर यूआईडीएआई के डेटाबेस से आपका नाम, फोटो और जन्म तिथि जैसी जानकारी उठाएगा।
-आपका नंबर जांचने के लिए आईवीआर आपक नंबर की अंतिम चार डिजिट भेजकर कंफर्मेशन मांगेगा।
अगर नंबर सही है तो आपको एसएमएस के जरिए ओटीपी भेजा जाएगा।
-अब एक नंबर दबाकर आधार और मोबाइल नंबर की रिवैरिफिकेशन प्रक्रिया को पूरा कर दें।
-अगर आपके पास दूसरा मोबाइल नंबर है तो 2 नंबर को दबाएं। इसके आईवीआर की ओर से बताए गए स्टेप्स को फोलो करें। इसके साथ रजिस्टर्ड फोन को भी अपने पास रखें। ऐसा इसलिए क्योंकि इसपर ओटीपी भेजा जाएगा।

Sunday, 14 January 2018

भारत भ्रमण पर निकली परशुराम यात्रा को सलूंबर आएगी

आपको नही होगा पताः तिल के आयुर्वेदिक एवं औषधीय गुण .. मकर संक्रांति विशेष

तिल के आयुर्वेदिक एवं औषधीय गुण

मकर संक्रांति विशेष
तिल तीन प्रकार के होते हैंः काले, सफेद और लाल। लाल तिल का प्रयोग कम किया जाता है। काले तिलों का प्रयोग भारतीय समाज में पूजा पाठ में होता आया है। और काले तिल ही सेहत के लिए कारगर होते हैं। भारतीय खानपान में तिलों का बहुत महत्व है। सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और शरीर सक्रिय रहता है। तिलों में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्लेमिक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्वन पाये जाते हैं। तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य की संभावना को कम करता है। तिलों का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती। प्राचीन समय से खूबसूरती बनाये रखने के लिए तिलों का प्रयोग किया जाता रहा है। तिलों का तेल भी बहुत फायदेमंद होता है। आइए हम आपको तिलों के औषधीय गुणों के बारे में बताते हैं। तिलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होता है। और इसमें विटामिन बी भी पाया जाता है। कफ जैसी बीमारी को दूर करने में तिल का सेवन करना फायदेमंद है। तिलों के सेवन से भूख बढ़ती है। और यह आपके नर्वस सिस्टम को बल देता है। यह वात, पित्त और कफ को नष्ट करता है। तिलों का तेल शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। क्योंकी यह एक आक्सीडेंट है। तिल के तेल से शरीर में मालिश करने से शरीर में बुढ़ापा जल्दी नहीं आता। इसकी मालिश करने से थकावट भी दूर होती है। यह बालों को काला, घना और मजबूत बनाता है। ह त्वचा को सनबर्न से मुक्ति दिलाता है। सर्दियों में तिल के तेल को त्वचा पर लगाने से त्वचा का रूखापन दूर होता है। और चेहरे में कांती आती है।


तिल के औषधीय गुण 

कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता हैः तिल में सेसमीन नाम का एन्टीऑक्सिडेंट होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता हैः इसमें नियासिन नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
तिल में जरूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।
शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता हैः तिलों में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिलों में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण को स्वस्थ रखने में मदद करता है- तिलों में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता हैः अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता से लड़ने में मदद करता है- तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।
डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज के स्तर को 36ः कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (जलचम 2 कपंइमजपब) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।
गर्भाशय की पीड़ा- तिलों को बारीक पीसकर तिल के ही तेल में मिला किंचित् गर्म करके नाभि के भाग में धीरे धीरे लेप करने या मलने (मर्दन करने) से शीत जन्यपीड़ा शान्त हो जाती है।
प्रमेह- तिल तथा अजवायन को दो एक के अनुपात में मिलाकर पीस लें और समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करवायें।
रक्त स्त्राव- प्रसूती या गर्भवती महिला के योनी मार्ग से रक्त निकलना बन्द नही हो तो तिल व जौ को कुटकर शक्कर मिलाकर शहद के साथ चाटना चाहिए।
रक्तार्श- लगभग 50 ग्राम काले तिलों को सोखने योग्य पानी में भिगोये। लगभग 30 मिनट जल में भीगे रहने के बाद उन्हें पीसकर उसमें लगभग एक चम्मच मक्खन एंव दो चम्मच मिश्री मिला दें। इसका प्रतिदिन दो बार सेवन करने से खूनी बवासीर (रक्तार्श) में लाभ होता है।
पेट दर्द-  20-25 ग्राम साफ तिल चबाकर उपर से गर्म पानी पिलाने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। साथ ही तिलों को पीसकर लम्बा सा गोला बनाकर उसे तवे पर सहन करने योग्य करके पेट के उपर फिराने से अत्यन्त से अत्यन्त कष्टदायी पेट का दर्द (उदर शूल) भी शान्त हो जाता है।
कब्ज- लगभग 60 ग्राम तिल लेकर उन्हे कूट लें फिर उनमें कोई मिष्ठान मिला लें। इसे खाने से कब्ज का नाश होता है।
सुखी खासी- यदि सर्दी के कारण सूखी खासी हो तो 4-5 चम्मच मिश्री एंव इतने ही तिल मिश्रित कर ले। इन्हे एक गिलास मे आधा पानी रहने तक उबाले। इसे प्रतिदिन प्रातः साय एंव रात्री के समय पीये।
आग से जलना- तिल जल में चटनी की भाती पीस लें। इस का दग्ध जले स्थान पर मोटा लेप करने से जलन शान्त हो जाती है।
मानसिक दूर्बलता- तिल गुड दोनो सममात्रा में लेकर मिला लें।उसके लड्डू बना ले। प्रतिदिन 2 बार 1-1 लड्डू दूध के साथ खाने से मानसिक दुर्बलता एंव तनाव दूर होते है। शक्ति मिलती है। कठिन शारीरिक श्रम करने पर सांस फूलना जल्दी बुढ़ापा आना बन्द हो जाता है।
दंत चिकित्सा- प्रातः काल तथा साय काल लगभग 50-50 ग्राम की मात्रा में (बिना मिठा मिलाये) धीरे धीरे काले तिल चबाकर उपर से पानी पीने से दात मजबूत मल रहित हो जाते है। और हिलते हुए दात भी पुनः जम जाते है।
पथरी- तिल क्षार को रोग की दशानुसार देशी शहद में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से पथरी रोग में लाभ होता है।
तिल आपके दांतों के लिए भी बहुत लाभकारी है। यह दातों को मजबूत और चमकदार बनाता है। आपको सुबह ब्रश करने के बाद काले तिलों को बारीक चबाकर खाना चाहिए यह प्राकृतिक रूप से दांतों को सुंदर और मजबूत बनाता है। यदि दांत में दर्द हो तो थोड़ा सा तिल के तेल से मुंह में कुला करें। दांतों के दर्द में राहत देता है।
तिल के तेल को सिर पर लगाने से आपकी बालों की समस्या तो दूर होती ही है, साथ के साथ यह बालों का झड़ना, उनका सफेद होना और गंजेपन की शिकायत दूर करता है।
इस तरह से तिलों को सेवन करने से आपको फायदा होगा। तिलों में बहुत ताकत होती है। सर्दियों में खासतौर पर तिलों का सेवन आप किसी न किसी रूप में जरूर करते रहें।

मकर संक्रांति का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

मकर संक्रांति का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

हिंदू त्योहार धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखते हैं। इस बात को हम इन पंक्तियों द्वारा समझ सकते हैं।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं।
द्वापर युग में महाभारत युद्ध के समय भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था।
उत्तरायण का महत्व बताते हुए गीता में कहा गया है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है।
इसी दिन भागीरथ के तप के कारण गंगा मां नदी के रूप में पृथ्वी पर आईं थीं। और राजा सगर सहित भागीरथ के पूर्वजों को तृप्त किया था।


मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व

मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है। इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं। इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का महत्व बहुत है।
मकर संक्रांति में उत्तर भारत में ठंड का समय रहता है। ऐसे में तिल-गुड़ का सेवन करने के बारे में विज्ञान भी कहता है। ऐसा करने पर शरीर को ऊर्जा मिलती है। जो सर्दी में शरीर की सुरक्षा के लिए मदद करता है।
इस दिन खिचड़ी का सेवन करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। खिचड़ी पाचन को दुरुस्त रखती है। इसमें अदरक और मटर मिलाकर बनाने पर यह शरीर को रोग-प्रतिरोधक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है।


क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति

हिंदू त्योहार धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखते हैं। मकर संक्रांति भी इन्हीं त्योहारों में से एक है। संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना।
इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।
मकर संक्रांति वैदिक काल से जारी है। दरअसल मकर संक्रांति का संबंध ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। यह पर्व अपना धार्मिक महत्व भी रखता है। इस दिन उत्तरायण के समय देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि होती है, वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है।
मकर संक्रांति के बाद माघ मास में उत्तरायण में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इस दिन के बाद हर दिन तिल-तिल बढता है इसलिए इसे तिल सक्रांति भी कहते हैं। इस पर्व को खिचड़ी सक्रांति भी कहा जाता है।

अंगुठे में समाये पारम्परिक खेल

अंगुठे में समाये पारम्परिक खेल












नरोत्तम पुरोहित 
सुर्य के उत्तरायण में आने पर मनाया जाने वाला पर्व मकर सक्रांति है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तीर्थ स्नान, दान पुण्य और सुर्य आराधना का विषेष महत्व है। इसी के साथ इस दिन अपने-अपने क्षेत्र के अनुरूप विभिन्न प्रारम्परिक खेलों को खेलने का भी विषेष महत्व है। गुजरात व इसके सिमावर्ती राजस्थान के कई जिलो में पतंगबाजी का लुप्त उठाया जाता है। मेवाड़, छप्पन व मेवल के इस क्षेत्र में सक्रांति के दिन युवक युवतियां सितोलिया, गील्ली दण्डा, मार धडाधड, हाॅकी के तर्ज पर खेले जाने वाला गेडीया खेल का आनन्द लेने में मस्त नजर आते थे। लेकिन बिते कुछ वर्षो से यह पारम्परिक खेल विलुप्तता की कगार पर खडे नजर आ रहे है। शरीर को चुस्त और तंदुरूस्त बनाने वाले इन पारम्परिक खेलो से आज की युवा पीढ़ी ने शायद मुह ही मोड़ दिया है और स्क्रीन को ही अपनी दुनिया समझने वाली यह युवा पिढ़ी इसमें मदमस्त होती नजर आ रही है। यही नही स्क्रीन की इस दुनिया में अपने कई पारम्परिक खेल भी सम्मिलित हो चुके है। जिसे युवा मोबाईल, कम्प्युटर में खेलते नजर आते है जिसे देख लगता है आज की युवा पीढ़ी के लिए पारम्परिक खेल अंगुठे में समाये हुए है। लेकिन हर परिवार को अपने युवाओं को चुस्त और तंदुरूस्त रखने के लिए फुटबाॅल, हाॅकी, कबड्डी के साथ अपने पारम्परिक खेलो की और रूख करवाना चाहिए। विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों, संस्थाओं, क्लबों को खेल प्रतियोगिताएं आयेाजित करनी चाहिए। हालांकि विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठन विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करते है परन्तु इन प्रतियोगिताओं में अपने पारम्परिक खेलो को प्राथमिकता से जोड़े जाने की आवष्यकता है।

Saturday, 13 January 2018

भाजपा नेता की हत्या के तीनों दोषियों को आजीवन कारावास

भाजपा नेता की हत्या के तीनों दोषियों को आजीवन कारावास 

प्लाॅट की रजिस्ट्री के बहाने बुलाकर टेंट हाउस के हथोडे से थी हत्या

सलूंबर। गुडेल निवासी भाजपा नेता माधुसिंह राठौड पिता कानसिंह की 5 साल पूर्व हुई हत्या के मामले में शुक्रवार को स्थानीय एडीजे कोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया। न्यायाधीश कैलाश चंद्र मिश्रा ने आरोपी बारापाल खजुरी हाल मुकाम आवरीमाता काॅलोनी सेन्ट्रल एरिया उदयपुर निवासी योगेष वडेरा, उपेंद्र उर्फ सोनू मीणा व गुडेल निवासी बंशीलाल नागदा को भादस की धारा 302/34, 201/34, 120 बी का दोषी करार दिया। जिस पर तीनों को आजीवन कारावास के साथ ही दस-दस हजार रूपये के अर्थदण्ड के आदेश दिए। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक नाहरसिंह चूंडावत ने आरोपियों के खिलाफ जुर्म साबित करने के लिए 52 गवाह तथा 120 साक्ष्य दस्तावेज पेश किए गए। मृतक परिवादी की ओर से सोहनलाल चैधरी ने पैरवी की।

उदयपुर में हत्या कर सलूंबर लाए थे शव:

मृतक माधुसिंह भाजपा की गुडेल इकाइ के अध्यक्ष थे। उनकी गांव के ही दुकानदार बंशीलाल नागदा की दुकान पर आने वाले योगेश से पहचान हुई और उदयपुर में एक प्लाॅट माधुसिंह को दिलाना तय हुआ। इसके एवज में योगेश ने मृतक से अलग-अलग किश्तों में साढे छह लाख रूपये ले लिए जबकि उसके पास ऐसा कोई प्लाॅट नहीं था। मृतक द्वारा योगेश व बंशीलाल पर प्लाॅट की रजिस्टी करवाने अथवा राशि वापस लौटाने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। माधुसिंह द्वारा किये जाने वाले रूपये या रजिस्टी के तकाजे से आरोपी आजीज हो चुके थे। जिसके चलते माधुसिंह की हत्या की साजिश रचकर रास्ते से ही हटाने का निर्णय लिया। माधुसिंह को आरोपियों ने फोन कर 1 मार्च 2013 को रजिस्टी कराने के बहाने उदयपुर बुलाया। जहां टेंट हाउस की दुकान पर माधुसिंह को धोखे से तसल्ली से कुर्सी पर बिठाकर योगेश व सोनू ने भारी भरकम हथोडे से सिर पर वार कर हत्या कर दी।
मृतक व आरोपी बंशीलाल के संयुक्त स्वामित्व का उदयपुर में एक प्लाॅट है। जिसे भी बंशीलाल पूरा हडपना चाहता था इसलिए वह भी हत्या की साजिश में शामिल हुआ। हत्या के बाद आरोपी बंशीलाल की मारूती वेन से मुल्जिम रात को शव व मृतक की मोटर साईकिल लेकर सलूंबर पहुंचे। यहां बांसवाडा रोड स्थित गणेश घाटी क्षैत्र में आरोपी ने हत्या को दुर्घटना का रूप देने की नियत से शव व मोटर साईकिल छोड कर भाग गए। अगले दिन सुबह लावारिश शव पडा होने की सूचना पर सनसनी फैल गई। शव की शिनाख्त के बाद मृतक के परिजनों, भाजपा कार्यकर्ताओं व राजपूत समाज ने हत्या की आशंका जताते हुए प्रदर्शन कर चक्काजाम कर दिया था। उदयपुर से पुलिस के आला अधिकारी अतिरिक्त जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति संभाली। फोरेंसिक टीम व डाॅग स्क्वायड ने भी मौका मुआयना कर आवश्यक कार्यवाही की थी। तत्कालीन थानाधिकारी गजेंद्रसिंह राव ने मृतक की काॅल डिटेल खंगाली जिसमें आरोपियों व मृतक के बीच बडा कनेक्शन मिला। पुलिस की कडी पुछताछ के बाद आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार कर ली।

सीएम का रवैया तानाशाही राज का नमुना

सलूंबर जिले सहित सभी मांगों को सिरे से नकारा

सीएम का रवैया तानाशाही राज का नमुना

विशेष संपादकीय - पंडित
सलूंबर को जिला बनाने की मांग को लेकर क्षैत्र के जनप्रतिनिधि कितने गंभीर है इसका ताजा उदाहरण क्षैत्रवासियों ने हाल ही देख लिया। गत रविवार को सलूंबर के राउमावि मैदान में आयोजित सीएम की जनसभा में क्षैत्र से कोई भी जनप्रतिनिधि जिले की मांग नहीं उठा पाए। पालिका मुख्यालय पर हुई जनसभा में गृहमंत्री व मेवाड के भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया सांसद अर्जुनलाल मीणा, विधायक अमृतलाल मीणा, प्रधान फूलचंद मीणा, नपा अध्यक्ष कमला गांधी व पार्षदों में से किसी ने जिले की मांग में रूचि नहीं दिखाई। जिले की घोषणा के लिए संबंधित व सक्षम नेता के समक्ष जनप्रतिनिधियों की यह दशा सोचनीय विषय है। जबकि लंबे समय से सभी चुनावों में सलूंबर जिले की मांग खास मुद्दा रही है। जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद भी कई मौको पर जिले की मांग को दोहराने, भुनाने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोडी है।
इस बीच सत्तारूढ भाजपा संगठन की ओर से भी इस मांग का सीएम के सामने जिक्र तक नहीं गया। यह भी कही न कही पदाधिकारियों की पदलोलुपता व गुटबाजी का उदाहरण है। खैर, क्षैत्र की इस जायज मांग को यहां की अवाम ने ही जनसभा में नारेबाजी करते हुए रख दिया। फिर जो हुआ उसने प्रदेश में लोकतंत्र के राज पर ही सवाल खडे कर दिए। सीएम ने अवाम के सामने जिले की मांग पर दो टूक प्रतिक्रया देते हुए प्रदेश में तानाशाही के राज की मिसाल दे दी। सीएम के रवैये के बाद लोगों में पूरा आयोजन ही फेल होने की चर्चा बनी हुई है। वहीं जनप्रतिनिधियों व सत्तारूढ पार्टी की जिले की मांग में भूमिका पर कई सवाल खडे कर दिए है। इधर, क्षैत्रीय विधायक ने जनसभा में मंच से कुछ मांगें भी रखी लेकिन उसमें भी जिला नदारद था। उन्होंने विधायक बनते ही जो मांगे उठाई जिन्हें ही मंच से दोहराया। इसमें माही-जाखम-जयसमंद बांध को जोडना, सलूंबर में 250 बेड का हाॅस्पीटल, एडीएम, आरटीओ, डीईओ कार्यालय आदि प्रमुख है। हालांकि इन पर भी सीएम ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और उल्टी भडक कर आंख दिखाने लगी। प्रदेश में सत्ता में आने के बाद सरकार की ओर से जनसुनवाई अभियान चलाया गया था। जिसमें केबीनेट मंत्री युनुस खान ने सलूंबर पालिका को दमकल वाहन देने की घोषणा की थी जिसे भी अभी तक मूर्त रूप नहीं मिला है। यहां सीएम की जनसभा में क्षैत्रवासियों को सलूंबर को जिले का दर्जा नहीं दिए जाने की स्थिति में किसी अन्य बडी विकास योजना अथवा सलूंबर के प्रशासनिक ढांचे में वृद्धि व मजबुती की भी उम्मीद थी लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।

Friday, 12 January 2018

महान प्रेरणा स्रोतः स्वामी विवेकानंद

महान प्रेरणा स्रोतः स्वामी विवेकानंद

भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को सूर्योदय से 6 मिनट पूर्व 6 बजकर 33 मिनट 33 सेकेन्ड पर हुआ। भुवनेश्वरी देवी के विश्वविजयी पुत्र का स्वागत मंगल शंख बजाकर मंगल ध्वनी से किया गया। ऐसी महान विभूती के जन्म से भारत माता भी गौरवान्वित हुईं।
बालक की आकृति एवं रूप बहुत कुछ उनके सन्यासी पितामह दुर्गादास की तरह था। परिवार के लोगों ने बालक का नाम दुर्गादास रखने की इच्छा प्रकट की, किन्तु माता द्वारा देखे स्वपन के आधार पर बालक का नाम वीरेश्वर रखा गया।प्यार से लोग ‘बिले’ कह कर बुलाते थे। हिन्दू मान्यता के अनुसार संतान के दो नाम होते हैं, एक राशी का एवं दूसरा जन साधारण में प्रचलित नाम , तो अन्नप्रासन के शुभ अवसर पर बालक का नाम नरेन्द्र नाथ रखा गया।
नरेन्द्र की बुद्धी बचपन से ही तेज थी। बचपन में नरेन्द्र बहुत नटखट थे। भय, फटकार या धमकी का असर उन पर नहीं होता था। तो माता भुवनेश्वरी देवी ने अदभुत उपाय सोचा, नरेन्द्र का अशिष्ट आचरण जब बढ जाता तो, वो शिव शिव कह कर उनके ऊपर जल डाल देतीं। बालक नरेन्द्र एकदम शान्त हो जाते। इसमे संदेह नही की बालक नरेन्द्र शिव का ही रूप थे।
माँ के मुहँ से रामायण महाभारत के किस्से सुनना नरेन्द्र को बहुत अच्छा लगता था। बालयावस्था में नरेन्द्र नाथ को गाङी पर घूमना बहुत पसन्द था। जब कोई पूछता बङे हो कर क्या बनोगे तो मासूमियत से कहते कोचवान बनूँगा।
पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखने वाले पिता विश्वनाथ दत्त अपने पुत्र को अंग्रेजी शिक्षा देकर पाश्चातय सभ्यता में रंगना चाहते थे। किन्तु नियती ने तो कुछ खास प्रयोजन हेतु बालक को अवतरित किया था।
ये कहना अतिश्योक्ती न होगा कि भारतीय संस्कृती को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो हैं स्वामी विवेकानंद। व्यायाम, कुश्ती,क्रिकेट आदी में नरेन्द्र की विशेष रूची थी। कभी कभी मित्रों के साथ हास दृपरिहास में भी भाग लेते। जनरल असेम्बली कॉलेज के अध्यक्ष विलयम हेस्टी का कहना था कि नरेन्द्रनाथ दर्शन शास्त्र के अतिउत्तम छात्र हैं। जर्मनी और इग्लैण्ड के सारे विश्वविद्यालयों में नरेन्द्रनाथ जैसा मेधावी छात्र नहीं है।
नरेन्द्र के चरित्र में जो भी महान है, वो उनकी सुशिक्षित एवं विचारशील माता की शिक्षा का ही परिणाम है। बचपन से ही परमात्मा को पाने की चाह थी। डेकार्ट का अंहवाद, डार्विन का विकासवाद, स्पेंसर के अद्वेतवाद को सुनकर नरेन्द्रनाथ सत्य को पाने का लिये व्याकुल हो गये। अपने इसी उद्देश्य की पूर्ती हेतु ब्रह्मसमाज में गये किन्तु वहाँ उनका चित्त शान्त न हुआ। रामकृष्ण परमहंस की तारीफ सुनकर नरेन्द्र उनसे तर्क के उद्देश्य से उनके पास गये किन्तु उनके विचारों से प्रभावित हो कर उन्हे गुरू मान लिया। परमहसं की कृपा से उन्हे आत्म साक्षात्कार हुआ। नरेन्द्र परमहंस के प्रिय शिष्यों में से सर्वोपरि थे। 25 वर्ष की उम्र में नरेन्द्र ने गेरुवावस्त्र धारण कर सन्यास ले लिया और विश्व भ्रमण को निकल पङे।
1893 में शिकागो विश्व धर्म परिषद में भारत के प्रतीनिधी बनकर गये किन्तु उस समय युरोप में भारतीयों को हीन दृष्टी से देखते थे। उगते सूरज को कौन रोक पाया है, वहाँ लोगों के विरोध के बावजूद एक प्रोफेसर के प्रयास से स्वामी जी को बोलने का अवसर मिला। स्वामी जी ने बहिनों एवं भाईयों कहकर श्रोताओं को संबोधित किया। स्वामी जी के मुख से ये शब्द सुनकर करतल ध्वनी से उनका स्वागत हुआ। श्रोता उनको मंत्र मुग्ध सुनते रहे निर्धारित समय कब बीत गया पता ही न चला। अध्यक्ष गिबन्स के अनुरोध पर स्वामी जी आगे बोलना शुरू किये तथा 20 मिनट से अधिक बोले। उनसे अभिभूत हो हजारों लोग उनके शिष्य बन गये। आलम ये था कि जब कभी सभा में शोर होता तो उन्हे स्वामी जी के भाषण सुनने का प्रलोभन दिया जाता सारी जनता शान्त हो जाती।
अपने व्यख्यान से स्वामी जी ने सिद्ध कर दिया कि हिन्दु धर्म भी श्रेष्ठ है, उसमें सभी धर्मों समाहित करने की क्षमता है।इस अदभुत सन्यासी ने सात समंदर पार भारतीय संसकृती की ध्वजा को फैराया।
स्वामी जी केवल संत ही नही देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक एवं मानव प्रेमी थे। 1899 में कोलकता में भीषण प्लेग फैला, अस्वस्थ होने के बावजूद स्वामी जी ने तन मन धन से महामारी से ग्रसित लोगों की सहायता करके इंसानियत की मिसाल दी। स्वामी विवेकानंद ने, 1 मई,1897 को रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। रामकृष्ण मिशन, दूसरों की सेवा और परोपकार को कर्मयोग मानता है जो कि हिन्दुत्व में प्रतिष्ठित एक महत्वपूर्ण सिध्दान्त है।
39 वर्ष के संक्षिप्त जीवन काल में स्वामी जी ने जो अदभुत कार्य किये हैं, वो आने वाली पिढीयों को मार्ग दर्शन करते रहेंगे। 4 जुलाई 1902 को स्वामी जी का अलौकिक शरीर परमात्मा मे विलीन हो गया।

स्वामी जी का आदर्श- “उठो जागो और तब तक न रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए” अनेक युवाओं के लिये प्रेरणा स्रोत है। स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनकी शिक्षा में सर्वोपरी शिक्षा है ”मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।”


Saturday, 6 January 2018

नवकुण्डामत्मक हवन यज्ञ आज से

बायणमाता मंदिर में शतचण्डी नवकुण्डामत्मक हवन यज्ञ आज से

रावतचूंडा जयंति कार्यक्रम में सीएम के आने की संभावना

सलूंबर। स्थानीय रावत चूंडा स्मृति संस्थान की ओर से मूल पुरूष चूंडा की जयंति के मौके पर आयोजित शतचंण्डी पाठ व नवकुण्डात्मक हवन यज्ञ शनिवार से शुरू होगा। राजमहल परिसर के बाणमाता मंदिर में आयोजित अनुष्ठान की पूर्णाहुति रविवार को होगी। इसमें संस्थान के संरक्षक व सलूंबर पूर्व राजघराने के मौजुदा उत्तराधिकारी देवव्रतसिंह चूंडावत सहित मेवाड वागड के विभिन्न पूर्व राजघरानों के सरदार शामिल होंगे। इधर, रविवार को ही सीएम वसुंधरा राजे का भी मुख्यालय पर प्रस्तावित दौरा है। जिसके चलते सीएम के भी आयोजन में शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। संस्थान सूत्रों के अनुसार वल्लभनगर विधायक रणधीरसिंह भीण्डर ने शुक्रवार को सीएम को आमंत्रण दिया है।
संस्थान के भंवरसिंह चूंडावत ने बताया कि मंदिर सहित पूरे परिसर को सजाया गया है। यज्ञ मण्डप में विधानपूर्वक 9 कुंड तैयार किये गए है। मेवाड वागड के 25 ब्राह्मण अनुष्ठान में हिस्सा ले रहे है। इधर, हरिशचंद्रसिंह चूंडावत ने बताया कि तैरियारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। शुक्रवार को पंडितों ने मंत्रोच्चार के बीच यजमान गोविंदसिंह कृष्णावत के हाथों अभिजीत मुहूर्त में शुद्धिकरण, प्रायश्चित कर्म, एकलिंगजी रूद्राभिषेक व मंडप पूजन आदि कराए। ख्यात ज्योतिषाचार्य मनोहरसिंह कृष्णावत ने भी माता के दर्शन किये। भगवतसिंह, नरवरसिंह, संजयसिंह, करणसिंह आदि मौजुद थे। ने बताया कि शनिवार को सुबह 8 बजे गणपति पूजन, शतचंडी पाठ और शाम को महाआरती के बाद भजन संध्या व रात्री जागरण होगा। अगले दिन रविवार को सुबह साढे 11 बजे हवन यज्ञ में पूर्णाहूति होगी। इसके बाद रावत चूंडा जयंति कार्यक्रम होगा।


मुख्यमंत्री का सलूम्बर दौरा, अधीक जानकारी के लिए क्लीक करे

मुख्यमंत्री के स्वागत में सवरने लगा सलूम्बर

सभा स्थल 
सलूंबर। राजस्थान सरकार की मुख्मंत्री वसुंधरा राजे का मुख्यालय पर रविवार होने वाले प्रस्तावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रषासन नगर को सवारने में जुटा हुआ है। नगर के कोने कोने से गंदगी साफ की जा रही है तो वही दुसरी ओर सभा स्थल के साथ अन्य प्रषासनिक कार्यालयो पर रंग रोगन कर उन्हे सजाया जा रहा है। वही लोकार्पित होने वाले नवनिर्मित नगर पालिका कार्यालय, गौरवपथ के साथ पं. दीनदयाल उपाध्याय काॅलोनी स्थित सामुदायिक भवन व उद्यान को भी सजाने सवारने का कार्य अंतिम चरणो में होता नजर आ रहा है। इसी के साथ करीब 600 करोड़ के लोकार्पण व षिलान्यास के करीब 2 दर्जन से अधिक कार्यो की तैयारियों में प्रषासन जुटा हुआ नजर आ रहा है।
जानकारी अनुसार 7 जनवरी को दोपहर स्थानीय रा.उ.मा.वि. के मैदान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की आम सभा होनी है वही से राजे करीब 2 दर्जन से अधिक विकास कार्यो के लोकार्पण व षिलान्यास करेगी तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय काॅलोनी पहूंच उपाध्याय की मूर्ति का अनावरण भी करने की जानकारी मिली है। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला कलेक्टर विष्णु चरण मलिक, एसपी राजेन्द्र प्रसाद गोयल, एडीएम देवासी, सीईओ अविरल चतुर्वेदी, उपखण्ड अधिकारी धर्मराज गुजर, तहसीलदार डायालाल पाटीदार के साथ विधायक अमृृतलाल मीणा, पालिका अध्यक्ष कमला गांधी, उपाध्यक्ष विजेष भलवाड़ा सहित पार्षदो ने भी सभा स्थल का जायजा लिया तथा अन्य आवष्यक दिषा निर्देष भी अधिकारीयों को दिये। वही दुसरी ओर भाजपा की ओर से नगर अध्यक्ष करण सिंह पंवार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर कार्यकर्ताओं को आम सभी में अधिक से अधिक जन समुह को एकत्रित करने के साथ अन्य तैयारीयों को पूर्ण करने की जिम्मेदारिया सौंपी गयी।


जिले की आस में है क्षैत्रवासी

मुख्यमंत्री राजे की सभा को लेकर क्षेत्र में एक विषेष माहोल भी देखा जा रहा है। क्षेत्रवासी इस आस में भी नजर आ रहे है कि राजे सलूम्बर आकर क्षेत्रवासीयों को जिले का तोहफा देकर जाये वही जानकारी मिली है कि सभा के दौरान जिला बनाओ संघर्ष समिति भी राजे से मिलकर जिले की मांग को रखने में है।
जानकारी अनुसार विधायक मीणा भी मुख्यमंत्री से जिले के साथ जयसमंद में माही का पानी लाने, स्थानीय राजकीय सामान्य चिकित्सालय को 250 बेड में क्रमोन्नत करवाने सहित अन्य विभिन्न मांगे रखेंगे।


यहा होगी पार्कींगः 

मुख्यमंत्री की सभा में रविवार को बांसवाडा रोड स्थित कृषि मंडी, सूरजपोल बाईपास स्थित चारभूजा ट्रस्ट की भूमि, उदयपुर रोड पर विद्यानिकेतन, हाडीरानी राजकीय महाविद्यालय आदि पार्किंग स्थल रहेंगे। जिसका एसपी गोयल ने शुक्रवार जायजा लिया और थाना परिसर में डिप्टी एसपी ताराराम बैरवा, थानाधिकारी शैलेन्द्रसिंह चैहान के साथ बैठक कर टेªफिक व्यवस्था चाक चैबन्द रखने के निर्देश दिए।
हेलीपेड का जायजा लेते कलेक्टर 

सभा स्थल का जायजा लेते एसपी गोयल 


ये होगे लोकार्पण व षिलान्यास

लोकार्पण 1257.50  लाख मे कीर की चैकी भीण्डर सलूम्बर कल्याणपुर रोड़, चावण्ड रोड़ 19 कि.मी., 975.35 करोड़ दो पुलिया पुनः निर्माण सलूम्बर - उदयपुर बांसवाडा रोड़, 148.20 लाख़ गौरव पथ नगरपालिका सलूम्बर, 93.25 लाख खरका लोदा ब्रिज, 91.52 लाख चैकड़ा लिम्बडी पुलिया गरगल नदी, 76.46 लाख पादरड़ा पुलिया, 136.08 लाख मुलेश्वर पुलिया गोमती नदी, 35.53 लाख पुलिया सगतपुर, 77.29 लाख पीलादर पुलिया, 103.64 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बरोड़ा, 74.71 लाख खण्डीय चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, 102 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बड़ावली, हाड़ीरानी पी.जी. काॅलेज, 585.70 करोड़ विवेकानन्द माॅडल स्कूल सराड़ा, 130 लाख शारदे छात्रावास, 75 लाख पण्डित दीनदयाल मूर्ति अनावरण एवं सामूदायिक भवन, 62.22 लाख कृषि मण्डी लिंक रोड़, 107 लाख नगरपालिका कार्यालय भवन, 240.62 करोड़ मे सलूम्बर से उदयपुर मेगा हाईवे, प्ण्च्ण्क्ण्ैण् योजना अन्तर्गत सब स्टेशन फिड 4.5 करोड़ के शिलान्यास।



Wednesday, 3 January 2018

सलूंबर मेें सीएम के प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां शुरू

सीएम के प्रस्तावित दौरे को लेकर सीईओ ने लिया जायजा


सलूम्बर। राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के 7 जनवरी रविवार नगर के प्रस्तावित दौरे को लेकर सीईओ अविरल चतुर्वेदी ने मंगलवार सभा स्थल का दौरा व अधिकारीयों की बैठक लेकर आवष्यक दिषा निर्देष दिये। बताया गया कि सीईओ चतुर्वेदी मंगलवार शाम सिनियर सेकण्डरी खेल मैदान पहूंचे जहां पर मंच निर्माण, सफाई व्यवस्था, हेली पेड, बैठक व्यवस्था, पार्कींग आदी की जानकारीयां ली। वहीं क्षेत्रिय विधायक अमृतलाल मीणा व खेरवाडा विधायक नानालाल अहारी से वार्ता की गयी। जिसके उपरान्त पंचायत समिति के सभागार में अधिकारीयों की बैठक आयोजित हुई। जिसमें आयोजन पर विस्तार से चर्चा करते हुए चतुर्वेदी ने फिडबेक लिया। इस दौरान एसडीएम धर्मराज गुजर, तहसीलदार डायालाल पाटीदार, डिप्टी एसपी टीआर बेरवा, ईओ गोविन्द माली, विकास अधिकारी धनपत सिंह राव, रेन्जर नटवरसिंह शक्तावत, सिंचाई विभाग अधिषाषी अंभियंता ऋषभ सिंघवी, पीडब्ल्युडी अधिषाषी अभियंता शांतिलाल खटीक, जलदाय विभाग सहायक अभियंता अरविन्द व्यास, भाजपा नगर अध्यक्ष करणसिंह पंवार, महामंत्री पुष्पेन्द्र सोनी, न.पा. उपाध्यक्ष विजेष भलवाडा, पूर्व नगर अध्यक्ष कैलाष गांधी, पार्षद संजय चाष्टा सहित कई अधिकारी व भाजपा के पदाधिकारी मौजुद रहे।

शरद पूर्णिमा के लिए पौराणिक भारतीय आयुर्वेद का विशेष योग

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