सलूंबर जिले सहित सभी मांगों को सिरे से नकारा
सीएम का रवैया तानाशाही राज का नमुना
विशेष संपादकीय - पंडितसलूंबर को जिला बनाने की मांग को लेकर क्षैत्र के जनप्रतिनिधि कितने गंभीर है इसका ताजा उदाहरण क्षैत्रवासियों ने हाल ही देख लिया। गत रविवार को सलूंबर के राउमावि मैदान में आयोजित सीएम की जनसभा में क्षैत्र से कोई भी जनप्रतिनिधि जिले की मांग नहीं उठा पाए। पालिका मुख्यालय पर हुई जनसभा में गृहमंत्री व मेवाड के भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया सांसद अर्जुनलाल मीणा, विधायक अमृतलाल मीणा, प्रधान फूलचंद मीणा, नपा अध्यक्ष कमला गांधी व पार्षदों में से किसी ने जिले की मांग में रूचि नहीं दिखाई। जिले की घोषणा के लिए संबंधित व सक्षम नेता के समक्ष जनप्रतिनिधियों की यह दशा सोचनीय विषय है। जबकि लंबे समय से सभी चुनावों में सलूंबर जिले की मांग खास मुद्दा रही है। जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद भी कई मौको पर जिले की मांग को दोहराने, भुनाने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोडी है।
इस बीच सत्तारूढ भाजपा संगठन की ओर से भी इस मांग का सीएम के सामने जिक्र तक नहीं गया। यह भी कही न कही पदाधिकारियों की पदलोलुपता व गुटबाजी का उदाहरण है। खैर, क्षैत्र की इस जायज मांग को यहां की अवाम ने ही जनसभा में नारेबाजी करते हुए रख दिया। फिर जो हुआ उसने प्रदेश में लोकतंत्र के राज पर ही सवाल खडे कर दिए। सीएम ने अवाम के सामने जिले की मांग पर दो टूक प्रतिक्रया देते हुए प्रदेश में तानाशाही के राज की मिसाल दे दी। सीएम के रवैये के बाद लोगों में पूरा आयोजन ही फेल होने की चर्चा बनी हुई है। वहीं जनप्रतिनिधियों व सत्तारूढ पार्टी की जिले की मांग में भूमिका पर कई सवाल खडे कर दिए है। इधर, क्षैत्रीय विधायक ने जनसभा में मंच से कुछ मांगें भी रखी लेकिन उसमें भी जिला नदारद था। उन्होंने विधायक बनते ही जो मांगे उठाई जिन्हें ही मंच से दोहराया। इसमें माही-जाखम-जयसमंद बांध को जोडना, सलूंबर में 250 बेड का हाॅस्पीटल, एडीएम, आरटीओ, डीईओ कार्यालय आदि प्रमुख है। हालांकि इन पर भी सीएम ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और उल्टी भडक कर आंख दिखाने लगी। प्रदेश में सत्ता में आने के बाद सरकार की ओर से जनसुनवाई अभियान चलाया गया था। जिसमें केबीनेट मंत्री युनुस खान ने सलूंबर पालिका को दमकल वाहन देने की घोषणा की थी जिसे भी अभी तक मूर्त रूप नहीं मिला है। यहां सीएम की जनसभा में क्षैत्रवासियों को सलूंबर को जिले का दर्जा नहीं दिए जाने की स्थिति में किसी अन्य बडी विकास योजना अथवा सलूंबर के प्रशासनिक ढांचे में वृद्धि व मजबुती की भी उम्मीद थी लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
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