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चेत मास आते-आते नवीन चना, जौ की कटाई पूरी हो चुकी है। सूर्य के अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश के साथ शुभ कार्य आरंभ हो रहे हैं।
संक्रांति है ना! हम संक्रांति के बिस्वासी हैं। बरस में बारह बार संक्रांति होती है। ग्रहों की होती है तो गृहों में भी, गणना में होती है तो आहार में भी।
नव वर्ष की मान्यता है। इसको पूर्व और दक्षिण तक पर्व के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में सतुआनी का सेवन होता है।
यूं इस चना, जौ के सत्तू का बड़ा महत्व है। सत्तू गर्मी से बचाता है। किसान का मुख्य खाना है। इसके बाद वे पानी पीकर अपना काम करते रहते हैं।
इस आहार के साथ ही आम पुदीना की चटनी होती है। यही नहीं, अचार, यथा रुचि प्याज, हरी मिर्च और कच्चा आम थाली को सजा ही नहीं देते, जीभ को मजा भी देते हैं।
✍️ डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू
#सतुआनी #सत्तू
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