काषी षिवपुरी आश्रम में ‘‘अमृत महोत्सव’’ प्रारंभ
सलूम्बर। काषी षिवपुरी धाम ईंटालीखेडा से जुडे क्षैत्र के साधक आदि सुगंधेष्वरानंद प्रभु बा को ताईजी के नाम से ही जानते व पुकारते है। ईंटालीखेडा में ही 25 मई 1943 को प्रभु बा का जन्म हुआ। माता नाथी बाई व पिता रामेष्वर पाण्डे की कोख से जन्मी इस कन्या का जन्म नाम कल्पना रखा गया। पारिवारिक व्यवसाय, रोजगार आदि के चलते बाल्यकाल येवतमाल महाराष्ट्र में गुजरा। ईंटालीखेडा के ही त्रिवेदी परिवार में विवाह हुआ। पुत्र की बीमारी के चलते अध्यात्म व संतों में रूचि जगी। पति के साथ 7 जनवरी 1974 को पूणे में योगीराज वामन दत्तात्रेय गुलवणी महाराज से दीक्षा ली। प्रभु बा के सान्निध्य में 9 मई 1980 को ईंटालीखेडा में दत्त मंदिर की स्थापना की गई। अब तक 500 सामुहिक साप्ताहिक अखंड जाप कराए जा चुके है।तहसील के ईण्टालीखेडा स्थित काषी षिवपुरी आश्रम में अमृत महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को अखण्ड नाम जप साप्ताहिकी के साथ हुआ। एकता ध्यान योग एवं सेवा ट्रस्ट के संयोजक विनय त्रिवेदी ने बताया कि गुरूदेव परम पुज्य राजयोगी ‘प्रभु बा’ के 75 बसंत पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वासुदेव कुटुम्ब एंव समस्त षिव केन्द्र के तत्वावधान में काषी षिवपुरी आश्रम ईण्टालीखेडा में 29 दिसम्बर से 7 जनवरी 2018 तक अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
प्रतिदिन होंगे रात्रीकालीन कार्यक्रम
ट्रस्ट सुत्रानुसार अमृत महोत्सव में रात्रीकालिन कार्यक्रम की श्रंखला में 31 दिसम्बर को विराट भजन संध्या, 1 जनवरी को महालक्ष्मी म्युजिकल गु्रप द्वारा रिया गुप दिल्ली के कलाकारो द्वारा विभिन्न प्रकार की आध्यात्मिक झांकियों की प्रस्तुति दी जायेगी। 2 जनवरी से क्रमषः कवि सम्मेलन, देष के प्रसिद्व कव्वाल असलम शाबरी अपनी प्रस्तुति देंगे।
अवधेषानंदगिरी सहित कई संतों का मिलेगा सान्निध्य:
आयोजन में करीब आधा दर्जन प्रमुख संत-महंतों सहित कई साधु महात्मा शामिल होंगे। इसमें 6 जनवरी जुना अखाडा पीठाधीष्वर अवधेषानन्दगिरी महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा। इससे पूर्व 5 जनवरी को ईंटालीखेडा में गांव में गाजे-बाजे के बीच पालकी यात्रा निकलेगी। जिसमें मेवाड महामंडलेष्वर रास बिहारीषरण दास, बेणेष्वर पीठाधीष्वर गोस्वामी अच्युतानंद महाराज, उत्तम स्वामी, रघुवीर महाराज तलवाडा, कथा वाचक पुष्करदास महाराज सहित प्रभु बा के संन्यास आश्रम देवास व गुरू आश्रम पूणे के मठाधीष सम्मिलित होंगे। विभिन्न झांकियों के बीच धुमधाम से गांव की परिक्रमा की जाएगी।
दीक्षा तिथि को होगा तुलादान:
संत परंपरा अनुसार दीक्षा तिथि को ही जन्म तिथि माना जाता है। प्रभु बा की दीक्षा तिथि 7 जनवरी 1974 है। जिसके चलते इसी दिन जन्मोत्सव व चैतन्य दिवस भी मनाया जाता है। इस बार आध्यात्मिक महत्व के तुलादान को लेकर काफी उत्साह है। प्रभु बा के बराबर वजन की तुलादान में शामिल सामग्री को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि इसमें अधिकाधिक साधकों की भागीदारी सुनिष्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
यह होंगे पूजानुष्ठान:
अमृत महोत्सव के तहत 29 दिसम्बर ओम नमो भगवते वासुदेवाय का संगीतमय अखंड नाम जप साप्ताहिकी शुरू हुई जो 4 जनवरी तक दिन रात चलेगी। अखण्ड नाम जप साप्ताहिकी, महारूद्र, स्वाहाकार, महायज्ञ आदि आचार्य पुरूषोत्तम लाडसांवगीकर के निर्देषन में होंगे।


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