Tuesday, 1 March 2022

महाशिवरात्रि विशेष : शिव और उनके शास्‍त्र

Salumbar Blog |
भगवान शिव की महिमा अपरम्पार है। स्‍वयं ताे आशु आराधना से संतुष्‍ट हो जाने वाले आशुतोष, मगर उनके स्‍वरूप और साधना के संबंध में इतना लिखा गया है कि पढ़ने, समझने में और आचरण में लाने में कई जन्‍म पूरे हो जाएं। शैवागमों की शृंखला ही बहुत विस्‍तृत है। वैरोचन के 'लक्षणसार समुच्‍चय' में बावन आगमों के विशाल वांगमय पर विस्‍तार से विमर्श हुआ है। 

पुराविद डॉ. श्रीकृष्ण "जुगनू" बताते है कि
"कामिकागम", सुप्रभेदागम, अजितागाम, दीप्तागम के पूर्वार्द्ध और उत्तरार्द्ध शिवालय की रचना और अर्चना के विधान का आगार है।  यही वजह है कि कामिकागम के पूर्वार्द्ध को बहुत उपयोगी मानकर हिंदी अनुवाद किया जा रहा है।

भगवान् शिव के शास्‍त्र के रूप में 'शिवधर्म' और 'शिवधर्मोत्‍तर' ग्रंथों को रचा गया। दोनों में से पहले ग्रंथ में ब्राह्मीलिपि का जिक्र है जबकि दूसरे में नंदिनागरी लिपि का। इसी कारण से लगता है कि पहला ग्रंथ गुप्‍तकाल के आसपास लिखा गया जबकि दूसरा वातापी के चालुक्‍य के शासनकाल का होना चाहिए। ये वे ग्रंथ माने जा सकते हैं जो क‍ि लिंगपुराण, शिवपुराण, नंदिपुराण, सौरपुराण आदि के आधारभूत रहे हैं।

नन्दीकेश्वर पुराण और शंकर पुराण का उल्लेख हेमाद्रि ने किया है। शिवभागवत भी रहा। उक्त दोनों ग्रंथों के ही पहली बार संपादन-अनुवाद के दौरान मुझे लगा कि जटिल परंपराओं के विपरीत धर्म को आचरणमूलक अंग बनाने का प्रयास होना चाहिए। 

जीवन में सब पर करुणा, दया और सहयोग हो और स्‍वाध्‍याय को सर्वोच्‍च प्राथमिकता मिले और सरलतम रूप में शिव की आराधना हो। आतंक, द्वेषमूलक कुकर्मों से मुक्‍त होकर शिवानंद का अनुभव किया जा सकता है। शिव कल्‍याणकारी है, उनका यह भाव जीवन का ध्‍येय होना चाहिए।

इनमें शिवरात्रि का विधान नहीं आया किंतु लिंगपुराण, शिवपुराण, स्‍कंदपुराण और गरुड़पुराण में इस व्रत का विधान विशेषरूप से आता है। आबू के एक आदिम-आख्‍यान को इस व्रत का उत्‍स माना गया है। आज यह आख्‍यान इतना लोकप्रिय है कि इस कथा को सुने बिना इस पर्व का विधान पूरा नहीं होता।

न केवल भारत बल्कि मारीशस तक यही कथा लोकप्रिय है... लोक में शिव की यह व्याप्ति उनको लोकेश कहती है, जो लोक में कुछ प्राप्त है, वह लोकेश्वर का अनुग्रह... शिव सदैव कल्‍याणकारी रहें.
🌺

#शिवरात्रि #शिवशास्त्र #सलूम्बरब्लॉग
#shivashastra

शरद पूर्णिमा के लिए पौराणिक भारतीय आयुर्वेद का विशेष योग

S alumbar Blog |  ए क सूखे नारियल (खोपरा, गोटा, गोला) को बीच में से काटकर दो टुकड़े करें.  एक कांसी की थाली लें.  अब एक खोपरे के टुकड़े में ज...